लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन(LOUH PRAGALAK AGARIYA JANJATI BHARAT FOUNDATION)मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिला मे स्थित एक गैर लाभकारी सामाजिक संस्था है ज़ी सेक्शन -8 के तहत पंजीकृत संस्था है ll जो विशेष रूप से अगरिया आदिवासी सामुदाय के उत्थान, सशक्तिकरण और संस्कृति विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित है ll संस्था की मुख्य जानकारी :- ° स्थापना तिथि - लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन की स्थापना 20 मार्च 2023 को हुआ ll ° मुख्यालय - ग्राम -सोही बेलहा,पोस्ट -भाद, तहसील - कोतमा, जिला -अनूपपुर (मध्यप्रदेश) है ll ° मुख्य पदाधिकारी (संस्था संस्थापक / मैनेजिंग डायरेक्टर)- दशरथ प्रसाद अगरिया ° सदस्य - विजय कुमार अगरिया, रामखिलावन अगरिया, अन्नू अगरिया ° पंजीयन क्रमांक - 141979 ° CIN NO- U88900MP2023NPL064902 फाउंडेशन के प्रमुख उद्देश्य एवं कार्य:- लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन कई सामाजिक और कल्याणकारी गतिविधियों का संचालन करता है ll • शिक्षा सहायता :- जरूरतमंद बच्चों को स्कूल / कॉलेज मे प्रवेश दिलाना और बैग,कॉपी पुस्तके वितरित करना ll • स्कूलों का विकास ...
अगरिया आदिवासी समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति समाज मे शामिल किये जाने की मांग को लेकर ज़िला उमरिया म.प्र के अगरिया समाज के स्वजातीय बंधु एवं लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के कार्यकर्ताओ ने ज़िला कलेक्टर को राष्ट्रपति एवं राष्ट्रीय अ. ज. जा आयोग एवं आदिम जनजाति अनुसन्धान एवं विकास संस्था के नाम ज्ञापन सौपे
अगरिया आदिवासी समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति मे शामिल किये जाने को लेकर ज़िला उमरिया (मप्र) की टीम ने सौपा ज्ञापन ll
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बीते दिनों दिनांक 24/03/2025 को ज़िला उमरिया मध्यप्रदेश के अगरिया समाज के लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन ज़िला उमरिया के कार्यकर्त्ता एवं अगरिया समाज के स्वजातीय बंधुओ ने मिलकर ज़िला उमरिया कलेक्टर को माननीय राष्ट्रपति महोदय, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग मंत्रालय भारत सरकार एवं आदिम जाती अनुसन्धान एवं विकास संस्था भोपाल के नाम ज्ञापन सौपे ll ज्ञापन सौपने का उद्देश्य अगरिया जनजाति समाज को (PVTG) विशेष पिछड़ी जनजाति मे शामिल किये जाने की मांग है अगरिया समाज के लोग एवं लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन मैनेजिंग डायरेक्टर दशरथ प्रसाद अगरिया का कहना है की अगरिया आदिवासी समाज अन्य समाजो की अपेक्षा बहुत ही पिछड़ा समाज है ll इस समाज मे शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी का स्तर अति न्यून है तथा सामाजिक रहन सहन मे भी ये समाज बहुत ही पिछड़ा समाज है ll इस पिछड़े हुए समाज की ओर राज्य सरकार एवं भारत सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए फाउंडेशन एवं समाज के लोगो का निवेदन है की अगरिया आदिवासी समाज का मध्यप्रदेश मे सर्वे शिक्षा, व्यवसाय, नौकरी, सामाजिक रहन सहन को आधार मानकर लिया जाए ll इससे अगरिया जनजाति समाज के वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और सर्वे के आधार पर अगरिया जनजाति समाज को विशेष पिछड़ी जनजाति समाज (PVTG) मे शामिल किया जाय ll
अगरिया आदिवासी समाज के इतिहास कि बात करें तो अगरिया आदिवासी वही समाज है जो आदिकाल मे जंगलो मे निवास करते थे जहाँ इस समाज ने लौह अयस्क (लौह पत्थर)की पहचान किया और लौह अयस्क को अपने पारम्परिक भट्ठी मे (कोठी -चेपूआ ) गलाया और लोहा जैसे चमत्कारिक धातु से दुनिया को अवगत कराया ll यानि सीधे कहे तो अगरिया आदिवासी ही वो वैज्ञानिक समाज है जिसने लोहा जैसी चमत्कारिक धातु का सबसे पहले अविष्कार किया ll आज अगरिया आदिवासी समाज की संस्कृति को अपना कर कई कंपनी लोहा बना रहे है ll लेकिन अगरिया आदिवासी जिसने इस संस्कृति को जन्म दिया आज के इस आधुनिक परिवेश मे भी अति पिछड़ा समाज है ll अगरिया आदिवासी समाज की मांग है अगरिया समाज के पिछड़े पन को देखते हुए सरकार इस समाज का सर्वे ले और विशेष पिछड़ी जनजाति मे शामिल करें ll
ज्ञापन सौपने ज़िला उमरिया की टीम से विजय अगरिया (ज़िला सचिव), भोला अगरिया, रामरतन अगरिया, केशेलाल अगरिया सहित कई स्वजातीय बंधु एवं समाज के लोग मौजूद रहे ll
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