ज़िला उमरिया मप्र का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम 2025 का प्रथम चरण ग्राम बोदली मे संपन्न हुआ ll 👇 लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन मे ज़िला उमरिया के ग्राम बोदली मे, उमरिया जिले का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम का प्रथम चरण सम्पन्न हुआ ll दूसरा चरण माह जून एवं जुलाई के मध्य मे रखा जायेगा ll फाउंडेशन की ओर से जिलों के कार्यकर्त्ताओं से फाउंडेशन से जुड़ने एवं फाउंडेशन सम्बंधित गतिविधियों को जिलों मे पहुंचाने एवं जिलों को मजबूत बनाने के लिए फाउंडेशन अंतर्गत सभी जिलों मे अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम का आयोजन दो चरण मे करावाया जाता है ll पहला चरण माह दिसंबर - जनवरी के मध्य मे 1 दिन एवं दूसरा चरण माह जून एवं जुलाई मे सम्पन्न होना है ll उक्त फाउंडेशन के निर्देशनुसार ज़िला उमरिया मप्र का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम दिनांक 25/01/2026 को संपन्न हुआ ll बैठक मे कई जिले से सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे एवं निम्नलिखित बिन्दुओ पर चर्चा हुआ ll 1- माह - फाउंडेशन द्वारा जिलों मे निर्धारित मार्च एवं अप्र...
अगरिया जनजाति के पूर्व जनगणना आधारित कुछ आंकड़े वर्ष १८८१ में पूरे भारत वर्ष में अगरियो की संख्या 210918 मिली थी जिसमे सिर्फ 22957 मध्य प्रान्त में ही थे। निश्चित रूप से वे खेती करनेवाले अघरिया समुदायों के साथ भ्रमित हो गए। वर्ष 1891 में जब मध्यप्रांत में जनगणना कमिश्नर सर बेंजामिन राबर्टसन थे तो अगरियों की तीन वर्ग में गणना की गयी थी। गोंड आदिवाशियों के अंतर्गत अगरिया =0326 लोहार अगरिया =2380 लोहा बनाने वाले अगरिया =2470 अगर इन आंकड़ों की बात करे तो 414 गोंडी अगरिया तथा लोहा गलाने वाले अन्य 242 की संख्या को भी जोड़ा जाना चाहिए। वर्ष 1891 पूरे प्रदेश में (सेन्ट्रल प्रोविंस ) में जहा कुल 84112 लोहार थे उसमे से 3070 व्यक्तियों को लोहा गलाने व बनाने के धंधे में लगा हुआ बतलाया गया था। सागर ,जबलपुर तथा दमोह जिलों में कोंडा गोंड (१२७४) अगरिया और कही कही गोंड भी पाए जाते है। लोहार जाती में एक उपवर्ग था जो अगरिया कहलाता था जो मुख्य रूप से जबलपुर में पाए जाते थे। तथा सतपुड़ा जिलों में गोंडी लोहारो संख्या 4679 थी। ये द...