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एजेंडा वाचन एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम ll अगरिया समाज जोड़ो अभियान 2026 जिला रायगढ़ के ग्राम सरईपाली मे सम्पन्न हुआ ll लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन मे ll

अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम जो लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन से जुड़े सभी राज्यों के जिलों मे संपन्न कराया जाता है ll दिनांक 19 अप्रैल 2026 को जिला रायगढ़ के ग्राम सरईपाली मे सफलता पूर्वक संपन्न हुआ ll जिला रायगढ़ समिति एवं जिलाध्यक्ष श्री उबरन अगरिया जिनके सफल आयोजन से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ ll जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़ अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम हेतु लौह प्रगलक अगरिया भारत फाउंडेशन की ओर से नोडल / मुख्य अतिथि के रूप मे श्री अन्नू अगरिया एवं श्री गजपति अगरिया की नियुक्ति हुई थी जिनको कार्यक्रम मे उपस्थित होकर अपने कुशल नेतृत्व मे कार्यक्रम का सफल आयोजन संपन्न कराना था लेकिन दोनों नोडल के घर एक ही समय मे शादी लगन कार्यक्रम होने के वजह से दोनों नोडल उपस्थित नहीं हो पाए, दोनों नोडल की अनुपस्थिति मे रायगढ़ जिला के जिलाध्यक्ष श्री उबरन अगरिया ज़ी को ही नोडल का दायित्व फाउंडेशन द्वारा दिया गया  जिनके कुशल नेतृत्व मे अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम रायगढ़ जिला मे संपन्न हुआ ll  अगरिया समाज जोड़ो अभियान कार्यक्रम जहाँ आज लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के...

संविधान का निर्माण

संविधान का निर्माण    संविधान की रूपरेखा  # भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली सभा का गठन जुलाई  ,1946 में (कैबिनेट मिशन की संस्तुतियों पर ) किया गया।  #संविधान सभा जिसका चुनाव प्रादेशिक विधानसभाओ (केवल निम्न सदन )के सदस्यों द्वारा परोक्ष रूप से किया गया था। ,की पहली बैठक 9 दिसम्बर ,1946 को संपन्न हुई।  #मुस्लिम लीग ने संविधान सभा की पहली बैठक का बहिष्कार किया  था। इस प्रथम बैठक में  ही डॉ. सचिदानंद सिन्हा को  सर्वसम्मति से संविधान सभा  अस्थाई अध्यक्ष चुना गया। 11 दिसंबर ,1946 की बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सभा का स्थाई अध्यक्ष चुना गया।  #डॉ. बी आर अम्बेडकर की अध्यक्षता में संविधान सभा की प्रारूप समिति की स्थापना 29 अगस्त ,1947 को की गयी। अध्यक्ष सहित इसके सदस्यों की कुल संख्या सात थी। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष ,11 महीने और 18 दिन लगे।  #26 नवंबर ,1949 को संविंधान -सभा के अध्यक्ष के हस्ताक्षर के बाद इसे पारित घोसित किया गया।  #भारत का संविधान 26 नवंबर ,1949 को अंगीकार किया गया तथा 26 जनवरी ,1950 प्र...

भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ

  भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ  *प्रथम अनुसूची - इसमें भारतीय संघ के घटक राज्यों (29 राज्य )एवं संघशासित क्षेत्रो (7 ) का उल्लेख है।  *द्वितीय अनुसूची - इसमें भारतीय राजव्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों को प्राप्त होने वाले वेतन ,भत्ते तथा पेंशन आदि का उल्लेख  किया गया है।  *तृतीय अनुसूची - इसमें विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा पद ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का उल्लेख है।  *चौथी अनुसूची - इसमें विभिन्न राज्यों तथा संघीय क्षेत्रो का राज्य सभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है।  *पांचवी अनुसूची - इसमें विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रो और अनुसूचित जनजाति के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उल्लेख है।  *छठी अनुसूची - इसमें असम ,मेघालय ,त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजातीय क्षेत्रो  प्रशासन के  बारे उल्लेख है।  *सातवीं अनुसूची -  इसमें केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों के बटवारे  के बारे में दिया गया है इसके अंतर्गत तीन सूचिया है। -संघ सूची ,राज्य सूची एवं समवर्ती सूची।  *आठवीं अनुसूची - इसमें भारत की 22 भाषाओ  उल्ल...

भारत का संविधान

              भारत  का संविधान                  उद्देशिका  हम ,भारत के लोग ,भारत को एक [ सम्पूर्ण प्रभुत्व -संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य ] बनाने के लिए ,तथा उसके समस्त नागरिको को :   सामाजिक ,आर्थिक और राजनैतिक न्याय ,    विचार ,अभिव्यक्ति ,विशवास ,धर्म           और उपासना की स्वतंत्रता ,                 प्रतिष्ठा और अवसर की समता   प्राप्त कराने के लिए ,   तथा उन सब में   व्यक्ति  की  गरिमा और [राष्ट्र की एकता  और अखंडता ] सुनिश्चित करने वाली बंधुता    बढाने के लिए   ढृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर ,1949  ई. को एतदद्वारा इस संविधान को अंगीकृत ,अधिनियमित और आत्मार्पित करते है। 

ए टी एम् जारी होते ही हो जाता है पांच लाख बीमा

ए टी एम् जारी होते ही हो  जाता है  पांच लाख  बीमा  बैंको में ए टी एम् धारको का होता है दुर्घटना बीमा  किसी भी राष्ट्रीकृत या गैर राष्ट्रीकृत बैंक के उपभोक्ता ने यदि बैंक से ए टी एम् जारी करवाया है तो ए टी एम् जारी होते ही उस उपभोक्ता का 25000 से लेकर 5 लाख तक का दुर्घटना बीमा बैंक ने करवाया है।  यह जानकारी 99 % उपभोक्ताओं को नहीं है इतना ही नहीं बीमा योजना बिना कोई राशि जमा किये विकलांगता से लेकर मौत होने तक के मुआवजे का प्रावधान है।  बैंको में ए टी एम् धारको के लिए बीमा योजना प्रारम्भ हुए कई साल हो गए लेकिन आज तक लोगो को इस बात की जानकारी तक नहीं है और ना ही बैंक अधिकारी कर्मचारी कभी अपने ग्राहकों को यह बताते है। बैंको के ए टी एम् उपयोग करने वाले उपभोक्ता की यदि किसी दुर्घटना में मौत होती है तो उसके परिजन नियमानुसार मुआवजा पाने के अधिकारी हो जाते है।  लेकिन यह बात ज्यादातर लोगो को पता नहीं होती और बैंक आश्रितों को मिलने वाली राशि दबा लेती है।  इस स्थिति में ए टी एम् धारक को मिलता है लाभ  * दुर्घटना में एक हाथ और पैर से विकलांग होने पर 5...

जनजाति की विशेषता

  जनजाति की विशेषता :- 1 - सामान्य भाषा -प्रत्येक जनजाति की अपनी एक भाषा होती है , जिसके माध्यम से ये अपने अपने विचारो को व्यक्त करते है। जनजातियाँ प्रायः स्थानीय बोलियों का प्रयोग करते है।  2 -एक नाम -प्रत्येक जनजाति अपने नाम से पहचानी जाती है जनजाति के सदस्य अपने नाम से ही अपना परिचय प्रस्तुत करते है। जैसे -अगरिया ,गोंड ,बैगा आदि  3 -निश्चित भू भाग -जनजाति एक निश्चित भू भाग में निवास करती है।  एक निश्चित भू भाग में निवास करने के कारन ही जनजातियों में सामान्य जीवन की विशेषताएं विकसित हो  जाती है। इनकी संस्कृति ही इनकी पहचान है। जैंसे अगरिया छत्तिश्गढ़ में छोटा नागपुर के पठार एवं मध्यप्रदेश में डिंडोरी से नेतरहाट  या अमरकंटक जैसे कई क्षेत्रो में रेखांकित किया जा सकता है। बैगा जनजाति का बैगाचक क्षेत्र ,भरिया जनजाति का पातालकोट क्षेत्र ,माडिया जनजाति का अबूझमाड़ क्षेत्र।  निश्चित भू भाग जनजातियों की विशिष्ट पहचान है।  4 -सामान्य संस्कृति -प्रत्येक जनजाति अपनी विशिष्ट संस्कृति से जानी जाती है।  किन्तु एक ही जनजाति के सभी सदस्यों में एक सा...

जनजाति से आशय ,जनजाति क्या है ,जनजाति किसे कहते है

  जनजाति से आशय- भारतीय समाज  में जनजाति से  आशय वन्य जाती ,आदिवासी ,वनवासी, आदिमजाति गिरिजन आदि से है ,ये जनजाति ऐसे लोगो का समूह या समुदाय है जो आज भी जंगलो में निवास करते है। प्राकृतिक साधनो से ही अपना भोजन ग्रहण  करते है। आधुनिक सभ्य समाज से दूर रहते है तथा शिक्षा ,कृषि ,उद्योग धंधे आदि से अपरिचित है।  भारत की जनगणना 1991 के अनुसार -ये अपने सीमित साधनो से केवल जीवित रहना ही सीख सके है और आज भी विज्ञान  की इस चका चौंध व सभ्यता की होड़ से अपरिचित है। ऐसे ही अपरिचित लोगो का उल्लेख भारतीय संविधान में अनुसूचित आदिम जनजाति या जनजाति (ट्राइबल ) के अंतर्गत किया जाता है। " भारतीय इतिहास  में यदि बात करे तो आदिवासी समूह का वर्णन प्राचीन समय से मिलता है। डॉ श्री नाथ शर्मा जी  जनजातीय अध्यन के अनुसार -"भारतीय समाज में प्रागैतिहासिक काल से लेकर आज तक आदि समूहों एवं वनवासियों का उल्लेख प्राप्त होता रहा है। वैदिक एवं उत्तर वैदिक काल तथा महाकाव्य काल में जनजातियों के नाम भी उल्लेखित है। जनजाति या आदिम जाती अथवा आदिवासी ट्राइब्स  tribes शब्द का हिंदी रूपां...

16वी सदी में स्वदेशी विधि से उम्दा लोहा बनाते थे अगरिया आदिवासी

16 वी सदी में स्वदेशी  विधि से उम्दा लोहा बनाते थे अगरिया आदिवासी  उपलब्धि -डॉ दीपक द्विवेदी  शोध पत्र इंग्लैंड की शोध पत्रिका नेचर में प्रकाशित ,कलांतर यह कला लुप्त हो  गयी ,धौकनी का इस्तेमाल करते थे  कुछ इस तरह से थी हमारी अपनी स्वदेसी तकनीक -अगरिया आदिवासी जिस लौह अयस्क का उपयोग करते थे वह उच्च गुणवत्ता का था।   फोर्जिंग तकनीक थी जो लोहे के ऊपर एक परत बनाती थी जो लोहे को जंग रोधी बनाता था। लोहे को पीटने से भीतर सारे छिद्र बंद कर बाहरी तत्वों को अभिक्रिया कर जंग बनाने के कारक ख़तम हो जाते थे। लौह  अयस्क में कैल्सियम ,सिलिकॉन व फास्फोरस होता है ,जिसे जंग रोधी बनाने वर्तमान में ब्लास्ट फर्नेस ,फास्फोरस क्रोमियम व निकिल जैसे तत्व मिलाये जाते है। उस दौर में  पूरी तरह स्वदेसी तकनीक से कम तापमान व कम खर्च में वे घर में बना लोहा ज्यादा मजबूत ,जंग रोधक व सस्ता था ,वर्तमान में विदेशो में पेटेंट तकनीक उपयोग हो रही है।  जिस विधि से आज लोहा बनाया जाता है ,स्वदेसी तकनीक से भारत के अगरिया आदिवासी सदियों पहले उम्दा लोहा बनाया करते थे। तब की परंपरागत व...