ज़िला उमरिया मप्र का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम 2025 का प्रथम चरण ग्राम बोदली मे संपन्न हुआ ll 👇 लौह प्रगलक अगरिया जनजाति भारत फाउंडेशन के मार्गदर्शन मे ज़िला उमरिया के ग्राम बोदली मे, उमरिया जिले का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम का प्रथम चरण सम्पन्न हुआ ll दूसरा चरण माह जून एवं जुलाई के मध्य मे रखा जायेगा ll फाउंडेशन की ओर से जिलों के कार्यकर्त्ताओं से फाउंडेशन से जुड़ने एवं फाउंडेशन सम्बंधित गतिविधियों को जिलों मे पहुंचाने एवं जिलों को मजबूत बनाने के लिए फाउंडेशन अंतर्गत सभी जिलों मे अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम का आयोजन दो चरण मे करावाया जाता है ll पहला चरण माह दिसंबर - जनवरी के मध्य मे 1 दिन एवं दूसरा चरण माह जून एवं जुलाई मे सम्पन्न होना है ll उक्त फाउंडेशन के निर्देशनुसार ज़िला उमरिया मप्र का अगरिया समाज ज़िला विकास अभियान कार्यक्रम दिनांक 25/01/2026 को संपन्न हुआ ll बैठक मे कई जिले से सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे एवं निम्नलिखित बिन्दुओ पर चर्चा हुआ ll 1- माह - फाउंडेशन द्वारा जिलों मे निर्धारित मार्च एवं अप्र...
लोहे का प्रयोग आज आम बात हैं लोहे की चीजें हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई हैं ll लोहे का प्रयोग लगभग 3000 साल पहले सुरु हुआ ll जहाँ ऐसा प्रमाण मिलता हैं की अगरिया आदिवासी द्वारा लौह अयस्क से लोहा प्रगलित किया जाता था और बड़े बड़े वैज्ञानिक जैसे एलविन आदि कई वैज्ञानिको ने इस बात की पुष्टि किये हैं ll अगरिया जनजाति द्वारा लोहे पर कार्य किये जाने के कारण लोहार कहा गया जो आज भी कही कही वही बात सुनने को मिलता हैं ll महापाषाण कब्रों मे लोहे के औजार और हथियार बड़ी संख्या मे पूर्व मे मिले हैं ll करीब 2500वर्ष पहले लोहे के औजारों के बढ़ते उपयोग का प्रमाण मिलता हैं ll इनमें जंगलो एवं लकड़ी की कटाई करने के लिए कुल्हाड़ी और जुताई के लिए हलों के फाल शामिल हैं ऐसा माना जाता हैं की लोहे के फाल से क़ृषि उत्पादन बढ़ गया ll क़ृषि उत्पादन मे लोहे का महत्व :- लोहे के उत्पादन या प्रगलन से लोहे के उपयोग से क़ृषि क्षेत्र मे बड़े परिवर्तन आये हल के फाल जब लोहे के बनने लगे तो कठोर ज़मीन को लकड़ी की फाल की तुलना मे लोहे के फाल से आसानी से जोता जा सकता था ll इससे फसलो की उपज बढ़ गयी ll दूसरे, लोगो ने धान के पौधों का...